जादुई पत्थर की हिंदी कहानी | Jadui Patthar Ki Hindi Desi Kahani

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Jadui Patthar Ki Hindi Kahani
Jadui Patthar Ki Hindi Kahani

जादुई पत्थर की Hindi Kahani

यह हिंदी कहानी जादुई पत्थर की है, बहुत समय पहले की बात है, दौलतपुर गांव में एक पंडित अपनी पत्नी के साथ रहता था पत्नी का नाम भाग्यवती और साथ ही दो बच्चे पुत्र का नाम बलदेव और पुत्री का नाम सिया था। सिया अपने भाई से 5 साल बड़ी थी। वह दोनों भाई-बहन साथ ही स्कूल पढ़ने जाते थे।

एक रात सभी खाना खा रहे होते हैं तभी भाग्यवती अपने पति से बोलती है की हम लोग तो गरीबी में गुजारा कर रहे हैं, मैं नहीं चाहती हमारे बच्चों की गरीबी में पालन पोषण हो। पंडित इतने में कहता है तुम ठीक कह रही हो हमारे बच्चे गरीबी में नहीं रहेंगे। वह कुछ देर सोचता है और कहता है, हम लोग शहर चलते हैं। वहां कुछ काम धंधा करके अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाएंगे उसकी पत्नी इस बात से सहमत हो जाती है।

कुछ दिन बीतने के बाद वह अपने परिवार के साथ शहर की ओर निकल पड़ते हैं। उनके पास पैसे ना होने के कारण वह पैदल जाने का निश्चय करते हैं, शहर सड़क के रास्ते काफी दूर पड़ता है, जबकि वहीं जंगल के रास्ते उन्हें काफी नजदीक पड़ता है, वह जंगल का रास्ता चुनते हैं। वह जंगल के रास्ते निकल देते हैं शहर की तरफ चलते-चलते वह काफी दूर आ गए थे। इतने में भाग्यवती बोलती है, हम थक चुके हैं हमसे और चला नहीं जाता हमें कुछ देर रुक कर आराम करना चाहिए पंडित बोलता है, ठीक है, हम कहीं अच्छा सा जगह देखकर रुक जाएंगे आराम करने के लिए।

Jadui Patthar Ki Kahani

कुछ देर वह चलते हैं कि उन्हें एक मंदिर और एक नदी दिखाई देता है। वह वहीं पर रुकने का निश्चय करते हैं, पंडित की पूरा परिवार एक साथ बैठकर आराम करते है और कुछ भोजन भी करते है। इतने में पंडित बोलता है हमें अब चलना चाहिए क्योंकि शाम होते-होते हमें शहर भी पहुंचना है। वह और उसके परिवार नदी में हाथ धोने के लिए जाते हैं। बलदेव अपने हाथ नदी में धो रहा होता है तभी उसे ठंडी वस्तु महसूस होती है, बलदेव आश्चर्यचकित था कि इतनी गर्मी में यह वस्तु इतनी ठंडी कैसे हैं। वह उस वस्तु को बाहर निकलता है और देखता है। वह एक पत्थर था वह पत्थर अपनी बहन सिया को दिखाता है और कहता है देखो बहन यह पत्थर इतनी गर्मी में भी कितना ठंडा है।

इतने में बलदेव के पिता पुकारते हैं जल्दी आओ बच्चों हमें निकलना होगा। बलदेव उस पत्थर को अपने जेब में रख लेता है और अपने माता-पिता के साथ चल देता है। अब शाम होने को आया था जंगल में जंगली जानवर आवाज कर रहे थे तभी अचानक बलदेव और सिया को कुछ भेड़िये घेर लेते हैं। भाग्यवती बहुत डर जाती है और वह वही मूर्छित होकर गिर पड़ती है, उसके पिता उन भेड़ियों का ध्यान अपनी और आकर्षित करने के लिए अपने हाथों को जोर-जोर से हिलाता हैं और जोर-जोर की आवाज लगाता हैं। लेकिन कोई फायदा नहीं होता है, वह भेड़िये धीरे-धीरे उन बच्चों के पास आते जा रहे थे।

तभी अचानक बलदेव बड़ी फुर्ती के साथ एक भेड़िया को मार गिराता है, ऐसा वह सभी भेड़ियों के साथ करता है, उसके पिता और सिया आश्चर्यचकित थे कि यह बलदेव ने कैसे किया। अपने पत्नी को उठाता है, उठो भाग्यवती देखो हमारे बच्चे ठीक हैं। भाग्यवती बोलती है, हे भगवान तेरी लाख-लाख शुक्र है जो तूने मेरी बच्चों की रक्षा की, सभी आगे की ओर निकल जाते हैं। कुछ दूर जा ही रहे होते हैं उन्हें एक आवाज सुनाई देती है बचाओ बचाओ हमें छोड़ दो हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है।

Jadui Patthar Desi Kahani

वह उस आवाज की तरफ बढ़ते हैं तभी उन्हें चारों तरफ से जंगली डाकू पकड़ लेते हैं, पंडित का परिवार देखता है कि जिस व्यक्ति की आवाज आ रही थी वह एक धनी सेठ था। जिसे पेड़ों में बांध कर रखे थे पंडित के परिवार को भी पेड़ों से बांध दिया जाता है। डाकुओं का मालिक बोलता है, सेठ तेरा आदमी अभी तक पैसा लेकर नहीं आया। अगर वह नहीं आया तो मैं तुझे मार दूंगा पंडित और पंडित का परिवार डर जाता है। और बोलता है, हमें छोड़ दो हम लोग गरीब हैं, हम पैसे कमाने के लिए शहर की ओर जा रहे है।

सेठ का आदमी पैसों से भरा बैग लता है, वह पैसा डाकुओ के मालिक को देता है। डाकू उन पैसों को लेकर कहते हैं, अब इन सभी को मार दो अगर यह जिंदा रह गए तो हमारे लिए अच्छा नहीं होगा। सेठ कहता है अब तो हमने तुमको पैसे भी दे दिए हैं कृपया करके हमें छोड़ दो। लेकिन डाकू नहीं मानता वह अपने आदमी को इशारा करता है, उन सभी को मारने के लिए तभी गुस्से से बलदेव बंधी हुई रसिया को तोड़ देता है और पलक झपकते ही सभी डाकुओं को मार गिराता है, सेठ के साथ-साथ सभी लोग हैरान थे कि बलदेव कैसे उन डाकुओं को मार गिराया। सेठ बलदेव और बलदेव के परिवार का धन्यवाद करता हैं और उनसे कहते हैं कि आप लोग हमारे यहां काम क्यों नहीं करते।

यह सुनकर पंडित के परिवार सभी खुश हो जाते हैं और उस धनी सेठ के साथ उसके घर जाते हैं, सेठ पंडित को अपने घर का लेखा-जोखा का काम देता है। इस बात से सेठ का आदमी खुश नहीं होता है वह कुछ ही दिनों में षड्यंत्र कर पंडित के परिवार को घर से बाहर निकलवा देता है। वह शहर की तरफ निकलते हैं उन्हें रास्ते में कुछ ऊंचे ऊंचे चट्टान दिखाई देते हैं तभी अचानक बलदेव का पैर फिसल जाता है और वह एक पेड़ पर जा लटकता है, इस दौरान उसका जादुई पत्थर उसकी जेब से नीचे गिर जाता है। उसके पिता बलदेव के पास आते हैं और उसका हाथ पकड़ कर ऊपर खींच लेते हैं और वह बहुत ही आश्चर्यचकित थे क्योंकि जो पेड़ बलदेव के लटकने से उखड़ा था उसके नीचे ढेर सारा खजाना था वह खजाना डाकुओं का ही था।

जादुई पत्थर Hindi Kahani

इतने में बलदेव को एहसास होता है कि उसका जादुई पत्थर उसके जेब से फिसल कर नीचे खाई में गिर गया है। पत्थर के गिर जाने से बलदेव बहुत उदास हो जाता है, भाग्यवती पूछती है क्या हुआ बेटा तुम उदास क्यों हो वह जादुई पत्थर की सारी बात अपनी माँ को बताता है उसकी मां यह कहती हैं जाने दो बेटा वह पत्थर किसी और की मदद करने के लिए चला गया होगा या कहकर बलदेव की मां बलदेव को आश्वासन दिलाती हैं।

पंडित का परिवार उस खजाने को लेकर अपने गांव दौलतपुर आ जाते हैं। वह उन खजाने से एक अच्छा घर खरीदते हैं और एक ढाबा खोलते हैं। वह ढाबे को चलाने के साथ-साथ गरीब और असहाय लोगों का पेट भरते है। अब उस परिवार में सभी खुशी थे क्योंकि उनके पास अब एक अच्छा घर और धन कमाने के लिए कारोबार था वह खुशी-खुशी अपने जीवन को व्यतीत करने लगते हैं।

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